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कब है रक्षाबंधन? | क्यों मनाते हैं राखी का त्योहार? | क्या है रक्षाबंधन की कहानी?

भाई और बहन के प्यार भरे रिश्ते की पहचान होता है रक्षाबंधन का त्योहार। इस साल २०२४ में रक्षाबंधन १९ अगस्त को हो रहा है। हिन्दू केलेंडर के अनुसार यह त्योहार श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। सनातन संस्कृति में इस त्योहार का बड़ा महत्व है। यह एक परंपरा बन कर सदियों से चला आ रहा है।

आम तौर पर इसकी तैयारियाँ पंद्रह या बीस दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। रक्षाबंधन के त्योहार के रंग में सिर्फ घर ही नहीं बल्कि सड़कें और बाजार भी रंगे हुए होते हैं। दुकानें तरह तरह की राखियों से सजी होती हैं। साथ ही, कपड़ों की दुकाने, गिफ्ट शॉप और मिठाई की दुकानों के साथ-साथ शॉपिंग मॉल में भी इस त्योहार की थीम पर सजावट की जाती है! जो परिवार एक दूसरे से बहुत दूर कोई अलग राज्य या देश में रहते हों वे पहले ही राखी अलग अलग माध्यम से भिजवा देते हैं। बाकी इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर, तैयार हो कर, पूजा करके, मुहूर्त के अनुसार, परिवार की रक्षा के लिए सबसे पहले अपने भगवान को राखी बाँधकर रक्षाबंधन मनाते हैं।

फिर घर में, भाई के लिए मिठाइयाँ और व्यंजन बनते है, रिश्तेदारों से घर भरा हुआ सा रहता है। हर कोई अपनी पसंद के नए कपड़े पहन कर, नए उपहारों के साथ यह त्योहार मनाता है। रक्षाबंधन में बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती उतारती है और कलाई पर राखी बाँधती है। फिर पसंदीदा मिठाई खिलाकर भाई का  मुँह मीठा कराती है। तो भाई भी बहन के पैर छू कर आशीर्वाद लेता है और बहन को जो उपहार पसंद हो देता है। वर्तमान समय मे इस त्योहार को मनाने के तरीके भले ही अलग अलग हों। लेकिन इस त्योहार का मूल सदियों पहले से भी रहा है। जो हमे हमारे भारतीय इतिहास और वेद पुराण की कथाओं में देखने मिलता है।

द्रौपदी और कृष्ण की कहानी:

कहते हैं की जिस दिन कौरव सभा में भगवान कृष्ण उपस्थित थे उस दिन व्यक्तिगत शत्रुता के कारण शिशुपाल भगवान कृष्ण को अभद्र शब्द कहने लगा। फिर भी श्री कृष्ण शांत रहे। क्यों की उन्होंने शिशुपाल की माता और उनकी बुआ को यह वचन दिया था कि वह भाई होने के नाते शिशुपाल की ९९ गलतियाँ माफ कर देंगे।

इस लिए जब शिशुपाल अपनी सीमाएं तोड़ते हुए १०० वा अपशब्द बोलने गया तब भगवान ने अपना सुदर्शन चक्र छोड़ा और शिशुपाल का सर धड़ से अलग कर दिया। उस क्षण जब वह चक्र लौट कर भगवान के पास आया तब उनकी उँगली में हल्की सी खरोंच लग गई। ऐसे में द्रौपदी ने सीधा अपने वस्त्र से टुकड़ा निकाला और रक्षा सूत्र के तौर पर भगवान को बांध दिया। उस टुकड़े के ९९ धागों के बदले में भगवान ने भी ९९ वस्त्रों से ‘चीरहरण’ के समय द्रौपदी की रक्षा की।

इन्द्र और इंद्राणी की कथा:

एक बार देवों और असुरों के बीच युद्ध शुरू हुआ। जिसमे असुर बहुत ही बलवान साबित हो रहे थे। उनकी आसुरी शक्तियों के सामने देवों का जीत पाना असंभव सा लग रहा था। तब चिंतित हो कर देवराज इन्द्र और उनकी इंद्राणी देवताओं के गुरु बृहस्पति के पास गए और उनसे सहायता मांगी। तब गुरु बृहस्पति ने इंद्राणी से श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन राजा इन्द्र को रक्षा सूत्र बांधने कहा। इंद्राणी ने ठीक ऐसे ही किया। उस रक्षा सूत्र की महिमा के कारण देवताओं की रक्षा भी हुई और इन्द्र को युद्ध में विजय भी मिली।

Raksha Bandhan Theme Song

रक्षा बंधन कब है?

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 19 अगस्त 2024 दिन सोमवार को देशभर में मनाया जाएगा.

रक्षा बंधन पूनम कब है?

पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त सोमवार को है. फिर रक्षाबंधन का त्योहार उदयातिथि के आधार पर सोमवार 19 अगस्त को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का मुहूर्त कब है?

19 अगस्त को रक्षा बंधन का शुभ समय दोपहर 1:30 बजे से रात 9:08 बजे तक है।