Gita Jayanti 2022
गीता जयंती के बारे में
गीता जयंती वह दिन है जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाई थी। यह हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष महीने के 11 वें दिन शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है। महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले भगवद गीता का वर्णन स्वयं भगवान कृष्ण ने किया था। ऐसा माना जाता है कि महाभारत में पांडवों और कौरवों के वंश ने हर संभव सुलह के प्रयास के बाद भी युद्ध में जाने का फैसला किया था।
कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में ‘भगवद गीता’ को स्वयं कृष्ण ने अर्जुन को प्रकट किया था। अब इस स्थान को भारतीय राज्य हरियाणा में कुरुक्षेत्र कहा जाता है। कुरुक्षेत्र हिंदुओं का पवित्र और प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह किताब तीसरे व्यक्ति द्वारा लिखी गई है। जिसे संजय ने राजा धृतराष्ट्र को सुनाया था, क्योंकि गीता का वर्णन भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ था। संजय को उनके शिक्षक वेद व्यास ने आशीर्वाद दिया था और उन्हें यह शक्ति दी थी कि वे युद्ध के मैदान में होने वाली घटनाओं को दूर से ही देख सकते हैं।
गीता जयंती को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गीता जयंती का त्योहार भगवान कृष्ण के सभी भक्तों द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है। गीता में लगभग 700 श्लोक हैं जो कई मनुष्यों को जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में ज्ञान प्रदान करते हैं। जो आध्यात्मिक उन्नति करना चाहते हैं वे गीता का अध्ययन करें।
वर्ष 2022 में गीता जयंती 3 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी और यह पवित्र ग्रंथ भगवत गीता का 5159वां जन्म दिवस होगा।
इतिहास और महत्व
श्रीमद्भगवद्गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश सुनाया था। भगवद गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ध्यान योग और भक्ति योग की बहुत ही सुंदर चर्चा की गई है। यह यम-नियम और धर्म-कर्म के बारे में भी बताता है। गीता स्वयं कहती है कि ब्रह्म (भगवान) एक है। यही कारण है कि भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में गीता जयंती मनाई जाती है।
महाभारत युद्ध श्रीमद्भगवद गीता की पृष्ठभूमि प्रदान करता है। महाभारत के महान नायक, अर्जुन, जीवन में मिलने वाली समस्याओं से डरते थे, और क्षत्रिय, एक सामान्य व्यक्ति की तरह, उनकी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं और उनका सामना करने के बजाय उनसे दूर भागने का फैसला करते हैं। धर्म से भ्रमित होकर, हम सभी अस्पष्टता की स्थिति में परेशान हो जाते हैं और/या अर्जुन की तरह अपनी कठिनाइयों से बचने की कोशिश करते हैं।
महाभारत के पहले दिन युद्ध के मैदान में अपने शिक्षकों, भाइयों और रिश्तेदारों को विपक्ष में देखकर योद्धा अर्जुन भ्रमित और भयभीत हो गया। यह सब देखकर, अर्जुन उत्तेजित हो गया और कांपने लगा क्योंकि उसने अपना आपा खो दिया और अपने हथियार नीचे कर लिए, और एक क्षत्रिय के रूप में अपने दायित्वों की अनदेखी करते हुए उदास हो गया। उसने कृष्ण से कहा कि वह युद्ध में भाग लेने में असमर्थ है।
अर्जुन को दुःख में देखकर, भगवान कृष्ण ने अर्जुन के मन को प्रबुद्ध किया और उन्हें कर्म के महत्व को समझाया, और एक क्षत्रिय के रूप में उनकी जिम्मेदारियों को याद दिलाया। भगवान कृष्ण कहते हैं कि कर्म सभी के जीवन का एक हिस्सा है और उन्हें जीवन का निर्णय लेना है। भगवान कृष्ण, जो भगवान विष्णु के अवतार हैं, अर्जुन के सामने अपने वास्तविक रूप में आए और इस तरह उन्हें जीवन और सृष्टि के रहस्यों की शिक्षा दी। गीता की स्थापना अर्जुन और भगवान कृष्ण के बीच एक संवाद पर हुई थी और यही गीता जयंती की कथा है।
GITA JAYANTI QUOTES
1.
कर्म का सच्चा लक्ष्य आत्मा का ज्ञान है।
The Bhagavad Gita!
2.
बुद्धिमान अपनी चेतना को एकीकृत करते हैं और कर्म के फल के प्रति आसक्ति को त्याग देते हैं।
Shrimad Bhagavad Gita!
3.
एक जीव के संकट का कारण भगवान के साथ उसके संबंध की विस्मृति है।
Happy Gita Jayanti!
4.
जो हुआ, अच्छे के लिए हुआ।
जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है।
जो होगा, अच्छे के लिए भी होगा।
Happy Gita Jayanti!
5.
किसी और के जीवन की नकल को पूर्णता के साथ जीने की तुलना में अपने भाग्य को अपूर्ण रूप से जीना बेहतर है।
Happy Gita Jayanti 2022!
6.
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह मानता है, वैसा ही वह है।
Happy Gita Jayanti!
7.
परिवर्तन ब्रह्मांड का नियम है। आप एक पल में करोड़पति या भिखारी बन सकते हैं।
Happy Gita Jayanti 2022!
8.
संदेह करने वाले के लिए न तो यह लोक है और न ही परलोक और न ही सुख है।
Happy Gita Jayanti!
9.
आपको कर्म करने का अधिकार है, लेकिन कर्म के फल पर कभी नहीं।
Happy Gita Jayanti!
10.
प्रभु के चरण कमलों में पूर्ण समर्पण करें
पूर्ण मानव का यही एकमात्र व्यवसाय है।
Happy Gita Jayanti!
10.
उस दिन को मनाएं जब मानव जाति को श्रीमद भगवद गीता के रूप में महर्षि व्यास से सबसे बड़ा उपहार मिला।
Happy Gita Jayanti 2022!
11.
तुम खाली हाथ आए हो और खाली हाथ चले जाओगे।
Happy Gita Jayanti!
12.
जो कोई आसक्ति के बिना अपना कर्तव्य करता है, परिणामों को परमेश्वर को समर्पित कर देता है, वह पाप कर्मों से अप्रभावित रहता है, जैसे कमल पानी से अछूता रहता है।
Happy Gita Jayanti!
13.
एक महान व्यक्ति के कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा होते हैं। वह जो कुछ भी करता है वह दूसरों के अनुसरण के लिए एक मानक बन जाता है।
Happy Gita Jayanti!
14.
जो जन्मा है उसके लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है, जितना कि मृत के लिए जन्म। इसलिए जो अपरिहार्य है उसके लिए शोक न करें।
Happy Gita Jayanti 2022!
15.
जो मुझे सर्वत्र देखता है, और सब कुछ मुझमें देखता है, न मैं उससे हारा हूँ और न वह मुझसे हारा है।
Happy Gita Jayanti!
16.
किसी के मार्ग को अच्छे से करने से श्रेष्ठता के बिना अपने मार्ग को करने में अधिक खुशी है।
Happy Gita Jayanti 2022!
17.
मनुष्य अपने आप को ऊपर उठाए, वह अपने आप को नीचा न करे; क्योंकि यही आत्मा ही अपना मित्र है और यही आत्मा ही अपना शत्रु है।
Happy Gita Jayanti!
18.
जिसने गीता के ज्ञान को अर्जित कर लिया,
समझो उसने सारे संसार को पार लगा लिया।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
19.
सूना है जीवन गीता के बिन,
अपनाओ इसके नियम प्रतिदिन
हम देते हैं आपको शुभकामना,
आज है गीता जयंती का दिन।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
20.
तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो,
यही सबसे उत्तम सहारा है
जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त रहता है।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
21.
बनकर कृष्ण किसी अर्जुन को हिम्मत देना,
ज़िंदगी मिली है तो,
इसे भगवद्गीता के अनुसार जीना।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
22.
रखो अपने पुरुषार्थ पर यकीन,
अपनाओं गीता का ज्ञान प्रतिदिन
पार होगी तुम्हारी हर बाधा,
बोलो जय कृष्ण, जय राधा।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
23.
जिनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभाजित रहती है वो अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाते।
24.
भगवान समस्त आध्यात्मिक तथा भौतिकऔर उनसे ही प्रत्येक वस्तु उत्पन्न होती है।
25.
इस संसार में सारे जीव भगवान के ही अंश हैं।
26.
काम, क्रोध तथा लोभ ये तीन नरक के द्वार हैं।
27.
जहां भगवन हैं वहां ऐश्वर्य, विजय और अलौकिक शक्ति हमेशा रहती है।
28.
भगवान सबके ह्रदय में विराजमान हैं और उन्ही से ही स्मृति तथा विस्मृति आती है।
29.
भगवान को जानने के लिए एकमात्र साधन हैं भक्ति।
30.
अंत समय में जो जिस भाव का स्मरण करता है वो उसी भाव को प्राप्त होता है।
31.
प्रकृति निरंतर परिवर्तित होती रहती है।
32.
दुष्ट तथा मुर्ख लोग भगवान की शरण ग्रहण नहीं करते।
33.
ज्ञान को प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक है।
34.
भगवान पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता और न ही वो किसी कर्म बंधन में बंधते हैं।
35.
वर्ण विभाजन (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र) संबधित कर्म के अनुसार किये गए हैं।
36.
आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही मरती है।
36.
निष्काम कर्म की एक ही है परिभाषा
तू बस कर्म कर मत रखो फल की आशा !!
37.
गीता ज्ञान की धार है
गीता जीवन का सार है
ज्ञान से प्रसिद्ध गुप्त है
पीवत से आत्मा तृप्त है..!
38.
भगवान श्री कृष्ण में आस्था है
तो उलझन में भी रास्ता है !!
39.
जब से श्रीमद् भगवत गीता
को अपने जीवन में उतारा है
तब से जिंदगी में धन दौलत
और खुशियो का उजियारा है..!
40.
यह अर्जुन की दुविधा है
कि श्री कृष्ण की महिमा है
गीता कर्म की प्रतिभा है
भक्ति की गरिमा है..!
41.
श्रद्धा से जब सर झुके तो
ख्वाहिशों से दिल खाली हो जाए
गीता के अनमोल वचन से
जिंदगी में ज्ञान का दीपक जग जाए !
42.
गीता श्री कृष्ण का दिव्य गीत है ये
भक्त और भगवान का मीत है ये !!
43.
जिस इंसान के मन में
श्रद्धा और आशाएं होती है
वो जिंदगी की हर
परिस्थिति में जीतता है!!
44.
तरकश से तीर निकालने
वाला हर योद्धा महान नही
होता और इस संसार में
अर्जुन जैसा धनुर्धर नही होता..!
45.
जब न्याय का फैसला
सत्य के पक्ष में ना हो
तो शस्त्र उठाना
आवश्यक हो जाता है..!
46.
कुरुक्षेत्र से एक ज्ञान मिला
जिसे हम गीता कहते है
जनकपुर से एक देवी मिली
जिसे हम सीता मैया कहते है!!
47.
युद्ध भूमि में गीता ने
ही सबको राह दिखाई है
गीता के बिना यहां
मुक्ति किसने पाई है!!
48.
हौसले को बढ़ाते रहो
अपने उत्साह के उमंग में
हरदम कदम बढ़ाते रहो
अपने मंजिल के गगन में!!
49.
तुलसी पूजन कीजिए
रख गीता को हाथ
नीज अस्तित्व ना खोइए
रहे संस्कृति के साथ !!
50.
मन को अगर अर्जुन सा
जिज्ञासु बना लिया तो
आपकी चेतना माधव
अपने आप बन जाएगी !!
51.
अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप
से अपने अंतर्दृष्टि में देखते
रहिए अपने कर्म को
सही दिशा में करते रहिए !!
52.
जब धर्म उतरता है
रणभूमि में तब
सारे अस्त्र और शस्त्र
अपने आप ही झुक जाते है !!
53.
सर्वोपरि है राष्ट्र धर्म मन
में ना रखो कोई भ्रम
गीता का यही मर्म करते
रहो तुम निष्काम कर्म !!
54.
चलो तुम एक बात मानो
श्री कृष्ण की गीता को जानो
सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे
देखने के सारे नजरिया बदल जाएंगे !!
55.
जीवन में अगर खुश रहना है
तो अपने आप से प्रेम करना सीखो
केवल स्वयं से अपेक्षा रखें अन्य से नही !!
56.
“कर्म करो और फल की चिंता मत करो”
57.
“आत्मा न शस्त्र से कटती और ना आग से जलती है”
58.
“कर्म से बढ़कर और कुछ नहीं”
59.
“बुद्धि का नाश होने पर मनुष्य खुद का नाश कर बैठता है”
60.
“जब-जब अधर्म बढ़ेगा, तब-तब मैं अवतार लूंगा”
61.
“धर्म की स्थापना के लिए मैं प्रत्येक युग में जन्म लेता आया हूं”
62.
“श्रेष्ठ पुरुष जो काम करते हैं, आम इंसान भी वैसा ही कार्य करते हैं”
63.
“इन्द्रियों पर संयम रखने वाले मनुष्यों को ही शान्ति की प्राप्ति होती है”
64.
“शोक मत करो, मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिला दूंगा”
65.
“मनुष्य जिस मन से मेरा नाम लेता है मैं उसे वैसा ही फल देता हूं”
GITA JAYANTI SPEECH
विश्व के किसी भी धर्म या संप्रदाय में किसी भी ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती। हिंदू धर्म में भी सिर्फ गीता जयंती मनाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है क्योंकि अन्य ग्रंथ किसी मनुष्य द्वारा लिखे या संकलित किए गए हैं जबकि गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के श्रीमुख से हुआ है-
या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनि:सृता।।
गीता जयंती एक प्रमुख पर्व है हिंदु पौरांणिक ग्रथों में गीता का स्थान सर्वोपरि रहा है. गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को कुरुक्षेत्र में हुआ था. गीता जयंती, यह दिन श्रीमद् भगवद्गीता की प्रतीकात्मक जयंती के रूप में मनाया जाता है। महाभारत समय श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को ज्ञान का मार्ग दिखाते हुए गीता का आगमन होता है. इस ग्रंथ में छोटे-छोटे अठारह अध्यायों में संचित ज्ञान मनुष्यमात्र के लिए बहुमूल्य रहा है.
अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर कर्म का महत्व स्थापित किया इस प्रकार अनेक कार्यों को करते हुए एक महान युग परवर्तक के रूप में सभी का मार्ग दर्शन किया.मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती के साथ साथ मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है. मोक्षदा एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को एकादशी के नाम के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं.
गीता अर्थात् योगश्वर श्रीकृष्ण के मुखारविंद से स्रवित माधुर्य व सौंदर्य का वांगयीन स्वरूप! भगवान गोपालकृष्ण की प्रेम मुरली ने गोकुल में सभी को मुग्ध किया तो योगेश्वर कृष्ण की ज्ञान मुरली गीता ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रवृत्त किया।
कर्म की अवधारणा को अभिव्यक्त करती गीता चिरकाल से आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितना तब रही. विचारों को तर्क दृष्टी के द्वारा बहुत ही सरल एवं प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया है संसार के गुढ़ ज्ञान तथा आत्मा के महत्व पर विस्तृत एवं विशद वर्णन प्राप्त होता है.
गीता में अर्जुन के मन में उठने वाले विभिन्न सवालों के रहस्यों को सुलझाते हुए श्री कृष्ण ने उन्हें सही एवं गलत मार्ग का निर्देश प्रदान करते हैं. संसार में मनुष्य कर्मों के बंधन से जुड़ा है और इस आधार पर उसे इन कर्मों के दो पथों में से किसी एक का चयन करना होता है. इसके साथ ही परमात्मा तत्त्व का विशद वर्णन करते हुए अर्जुन की शंकाओं का समाधान करते हैं व गीता का आधार बनते हैं.
भगवद् गीता के पठन-पाठन श्रवण एवं मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता के भाव आते हैं। गीता केवल लाल कपड़े में बाँधकर घर में रखने के लिए नहीं बल्कि उसे पढ़कर संदेशों को आत्मसात करने के लिए है। गीता का चिंतन अज्ञानता के आचरण को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है। गीता भगवान की श्वास और भक्तों का विश्वास है।
गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है। हम सब हर काम में तुरंत नतीजा चाहते हैं लेकिन भगवान ने कहा है कि धैर्य के बिना अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम और लोभ से निवृत्ति नहीं मिलेगी।
मंगलमय जीवन का ग्रंथ है गीता। गीता केवल ग्रंथ नहीं, कलियुग के पापों का क्षय करने का अद्भुत और अनुपम माध्यम है। जिसके जीवन में गीता का ज्ञान नहीं वह पशु से भी बदतर होता है। भक्ति बाल्यकाल से शुरू होना चाहिए। अंतिम समय में तो भगवान का नाम लेना भी कठिन हो जाता है।
गीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को व्यक्त करती है. कृष्ण के उपदेशों को प्राप्त कर अर्जुन उस परम ज्ञान की प्राप्ति करते हैं जो उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर उन्हें कर्म की ओर प्रवृत करने में सहायक होती है. गीता के विचारों से मनुष्य को उचित बोध कि प्राप्ति होती है यह आत्मा तत्व का निर्धारण करता है उसकी प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है. आज के समय में इस ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता है.
आज जब मनुष्य भोग विलास, भौतिक सुखों, काम वासनाओं में जकडा़ हुआ है और एक दूसरे का अनिष्ट करने में लगा है तब इस ज्ञान का प्रादुर्भाव उसे समस्त अंधकारों से मुक्त कर सकता है क्योंकी जब तक मानव इंद्रियों की दासता में है, भौतिक आकर्षणों से घिरा हुआ है, तथा भय, राग, द्वेष एवं क्रोध से मुक्त नहीं है तब तक उसे शांति एवं मुक्ति का मार्ग प्राप्त नहीं हो सकता.
नैनं छिदंति शस्त्राणी, नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयंतेयापो न शोषयति मारुतः ।।
सहित ऐसे अनेक श्लोक हैं जिन्हें पढ़ने और उनका अर्थ समझने से मनुष्य को जीवन के कष्टों से ना सिर्फ मुक्ति मिलती है, बल्कि वह जीवन के उस पथ को प्राप्त करता है जिसका ज्ञान स्वयं जगतज्ञानी परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया है।
गीता मंगलमय जीवन का ग्रंथ है। गीता मरना सिखाती है, जीवन को तो धन्य बनाती ही है। गीता केवल धर्म ग्रंथ ही नहीं यह एक अनुपम जीवन ग्रंथ है। जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए। गीता एक दिव्य ग्रंथ है। यह हमें पलायन से पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।
गीता जयंती पर संक्षेप्त भाषण
विश्व के किसी भी धर्म या संप्रदाय में किसी भी ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती। हिंदू धर्म में भी सिर्फ गीता जयंती मनाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है क्योंकि अन्य ग्रंथ किसी मनुष्य द्वारा लिखे या संकलित किए गए हैं जबकि गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के श्रीमुख से हुआ है-
“या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनि:सृता।।”
ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि “गीता जयंती” के नाम से भी प्रसिद्ध है। और इस एकादशी को “मोक्षदा एकादशी” कहते है. भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर, विश्व के मानव मात्र को गीता के ज्ञान द्वारा जीवनाभिमुख बनाने का चिरन्तन प्रयास किया है।
गीता अर्थात् योगश्वर श्रीकृष्ण के मुखारविंद से स्रवित माधुर्य व सौंदर्य का वांगयीन स्वरूप! भगवान गोपालकृष्ण की प्रेम मुरली ने गोकुल में सभी को मुग्ध किया तो योगेश्वर कृष्ण की ज्ञान मुरली गीता ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रवृत्त किया।
गीता का चिंतन अज्ञानता के आचरण को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है। गीता भगवान की श्वास और भक्तों का विश्वास है। मंगलमय जीवन का ग्रंथ है गीता। गीता केवल ग्रंथ नहीं, कलियुग के पापों का क्षय करने का अद्भुत और अनुपम माध्यम है। जिसके जीवन में गीता का ज्ञान नहीं वह पशु से भी बदतर होता है। भक्ति बाल्यकाल से शुरू होना चाहिए। अंतिम समय में तो भगवान का नाम लेना भी कठिन हो जाता है।
गीता मंगलमय जीवन का ग्रंथ है। गीता मरना जीना दोनों सिखाती है, जीवन को तो धन्य बनाती ही है। गीता केवल धर्म ग्रंथ ही नहीं यह एक अनुपम जीवन ग्रंथ है। जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए। गीता एक दिव्य ग्रंथ है। यह हमें पलायन से पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।
लाल कपड़े में बंधकर हम अपने घर में तो गीता ले आते है आज यदि किसी से पूंछा जाये तो सभी यही कहेगे कि हमारे घर में तो गीता है पर क्या आपके जीवन में गीता है? ,गीता के रहस्यों को समझना आसान तो नहीं है, पर हम ये सोचकर समझना तो नहीं छोड सकते ना ?जैसे अथाह समुद्र है उसमे से कोई एक चुरू ले जाता है, कोई एक लोटा ले जाता है, तो कोई एक गागर ले जाता है, ले जाने वाले की समर्थ पर निर्भर करता है. ऐसे ही गीता है हम कितना पा सकते है हमारे ऊपर ही निर्भर करता है.
हमें स्वयं से प्रश्न करते रहना चाहिये कि हमारा जन्म क्यों हुआ है ?जीवन केवल रोने के लिए नहीं है, जीवन केवल खाने पीने मौज मस्ती के लिए नहीं है, भाग जाने के लिए नहीं है, हँसने के लिए है, खेलने के लिए हैं, संकटों से, हिम्मत से लड़ने के लिए है, जो ज्ञान हमें गीता के मध्यम से भगवान दे रहे है उस पर चलकर औरो को भी प्रोत्साहित करने के लिए है.
धन्यवाद…
GITA JAYANTI WISHES
1.
गीता जयंती के शुभ अवसर पर आपको और आपके प्रियजनों को सुख, समृद्धि और वैभव की शुभकामनाएं। इस महत्वपूर्ण हिंदू पाठ से सीखने से भरा दिन बिताएं।
2.
भगवद् गीता से सीखने और इस जीवन को योग्य बनाने के लिए बहुत कुछ है। आपको गीता जयंती की बहुत बहुत शुभकामनाएं।
3.
हम वास्तव में धन्य हैं कि हमारे पास हमारे प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता जैसा ग्रंथ है। गीता जयंती की आपको हार्दिक बधाई।
4.
कर्म के बाद धर्म सबसे महत्वपूर्ण चीज है और ये दोनों हमारे जीवन को उल्लेखनीय तरीके से बदल सकते हैं। आपको गीता जयंती की शुभकामनाएं।
5.
गीता जयंती का अवसर सबसे महत्वपूर्ण हिंदू पाठ का उत्सव है जो सबसे चुनौतीपूर्ण समय में हमारा मार्गदर्शन करता है। गीता जयंती की सभी को शुभकामनाएं।
6.
आप अपने जीवन में कभी गलत नहीं हो सकते क्या आप जानते हैं कि आपको क्या करना है और भगवद गीता हमें यही सिखाती है। गीता जयंती की बहुत बहुत बधाई।
7.
गीता जयंती के विशेष अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई। आइए हम अर्जुन की तरह बनें और हमारे जीवन में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए भगवान कृष्ण हमेशा मौजूद रहेंगे।
8.
यदि आप एक सरल और सुखी जीवन जीना चाहते हैं तो आपको केवल गीता का पालन करना होगा। मेरे प्रिय आपको गीता जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
9.
जीवन बहुत सरल है लेकिन हम ही इसे इतना जटिल बनाते हैं। आइए हम गीता के उपदेशों का पालन करें और इसे एक सुंदर गीता जयंती बनाएं।
10.
गीता जयंती का अवसर हम सभी के लिए एक अनुस्मारक है कि हमारे जीवन में सभी कष्टों और अराजकता को समाप्त करने का एक आसान तरीका है और वह भगवद् गीता है। गीता जयंती की शुभकामनाएं।
11.
गीता जयंती का अवसर हमारे जीवन में वह शांति और खुशी लाए जिसकी हम सभी कामना करते हैं। आपको गीता जयंती की बहुत बहुत बधाई।
12.
जब भगवान कृष्ण हमारा मार्गदर्शन करने के लिए होते हैं, तो हम जानते हैं कि हम कभी गलत नहीं हो सकते। आपको गीता जयंती के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ भेजना।
13.
गीता जयंती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आइए हम हमेशा धर्म से संचालित कर्म करें और हम कभी गलत नहीं हो सकते।
14.
जब भी आप अपने आप को जीवन में भ्रमित और असहाय पाते हैं, तो हमेशा श्रीमद्भगवद्गीता में उत्तर की तलाश करें। मेरे प्रिय आपको गीता जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
15.
हम बेहद भाग्यशाली हैं कि हमारे जीवन में मार्गदर्शन पाने और हमारे कष्टों को समाप्त करने के लिए हमारे पास भगवद् गीता है। गीता जयंती की बहुत बहुत बधाई।
16.
यदि हम भगवद गीता की शिक्षाओं का पालन कर सकें तो जीवन बहुत अधिक सुखी और अधिक संतुष्ट होने वाला है। सभी को गीता जयंती की शुभकामनाएं।
17.
आइए हम सभी अपने गुरु को भगवान कृष्ण में खोजें और हम अपने जीवन में मोक्ष पाने जा रहे हैं। सभी को गीता जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
18.
गीता जयंती का अवसर हम में से प्रत्येक को याद दिलाता है कि हमें भगवद्गीता का अध्ययन करना चाहिए और सरल और रचनात्मक तरीके से अपनी समस्याओं का अंत करना चाहिए। गीता जयंती की शुभकामनाएं।
19.
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे – गीता जयंती के शुभ दिन पर मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य, धन, शांति और खुशी की कामना करता हूं।
20.
गीता जयंती के शुभ दिन पर, मैं आपको और आपके परिवार को प्यार, प्रकाश, खुशी, हंसी, धन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।
21.
गीता जयंती के इस पावन अवसर पर मैं आशा और प्रार्थना करता हूँ कि श्री कृष्ण की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। आपका दिल और घर सुख, शांति और समृद्धि से भर जाए। जय श्री कृष्ण!
22.
भगवान श्री कृष्ण की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। गीता जयंती के शुभ अवसर पर धेरों शुभकामनाएं।
23.
इस गीता जयंती, आइए हम सब दुर्योधन को खत्म करें जो विकसित होने और बेहतर इंसान बनने के लिए हमारे भीतर शरण चाहता है। केवल अच्छाई ही प्रबल हो। यहां आपको और आपके परिवार को गीता जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं
24.
गीता जयंती का यह शुभ अवसर आपके जीवन में बहुत सारी सकारात्मकता, शांति और सद्भाव लाए।
25.
श्रीकृष्ण आपको वह सब प्रदान करें जिसका आपने सपना देखा है। आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हों, और आप हमेशा मुस्कुराते रहें- आपके लिए एक बहुत ही आनंदमय वैकुंठ एकादशी।
26.
आइए हम विश्व शांति और खुशी के लिए प्रार्थना करने के लिए भगवान कृष्ण के सामने झुकें। कोई बीमारी से पीड़ित न हो, और कोई नफरत न हो। यहां आपको गीता जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
27.
यहां गीता जयंती के शुभ दिन श्री कृष्ण से शाश्वत शांति, खुशी, अच्छे स्वास्थ्य और धन की प्रार्थना की जा रही है।
28.
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – गीता जयंती के शुभ दिन पर आपको और आपके परिवार को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।
29.
जिसने गीता के ज्ञान को अर्जित कर लिया,
समझो उसने सारे संसार को पार लगा लिया।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
30.
सूना है जीवन गीता के बिन,
अपनाओ इसके नियम प्रतिदिन
हम देते हैं आपको शुभकामना,
आज है गीता जयंती का दिन।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
31.
तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो,
यही सबसे उत्तम सहारा है
जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त रहता है।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
32.
बनकर कृष्ण किसी अर्जुन को हिम्मत देना,
ज़िंदगी मिली है तो,
इसे भगवद्गीता के अनुसार जीना।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
33.
रखो अपने पुरुषार्थ पर यकीन,
अपनाओं गीता का ज्ञान प्रतिदिन
पार होगी तुम्हारी हर बाधा,
बोलो जय कृष्ण, जय राधा।
गीता जयंती की शुभकामनाएं!
34.
सूनी है जिंदगी गीता के बिन,
अपनाओं इसके नियम प्रतिदिन
हम देते हैं आपको शुभकामना,
आज है गीता जयंती का दिन
गीता जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!
35.
न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो।
यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है
और इसी में मिल जायेगा।
परन्तु आत्मा स्थिर है फिर तुम क्या हो?
गीता जयंती की शुभकामना
36.
आप सदा अच्छे कर्म करते रहें, जीवन के नियमों का पालन करते रहें। हमारी आपके लिए यही गीता जयंती की शुभकामनाएं हैं।
37.
हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ महा भागवत गीता के जन्म दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
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जिसने गीता के ज्ञान को अर्जित कर लिया, समझो उसने सारे संसार को पार लगा लिया।
39.
बनकर कृष्ण
किसी अर्जुन को हिम्मत देना,
जिंदगी मिली है तो
इसे भगवतगीतानुसार जीना।
40.
रखो अपने पुरुषार्थ पर यकीन
अपनाओ गीता ज्ञान प्रतिदिन,
पार होगी तुम्हारी हर बाधा
बोलो जय कृष्ण जय राधा।
41.
जो व्यवहार आपको दूसरो से पसन्द ना हो
ऐसा व्यवहार आप दूसरो के साथ भी ना करे..!!
42.
आप ही अपना मित्र और आप भी अपना शत्रु है
क्युकी स्वयं का पतन
और उद्धार दोनों आप निर्धारित करते हैं ..!!
43.
याद रखना अगर बुरे लोग सिर्फ
समझाने से समझ जाते तो
बांसुरी बजाने वाला भी
कभी महाभारत होने नहीं देता।
44.
गीता में कहा गया है
जो इंसान किसी की कमी को
पूरी करता है वो
सही अर्थों में महान होता है..!
45.
गीता के अनुसार
जिंदगी में हम कितने सही हैं
और कितने गलत हैं
यह केवल दो लोग जानते हैं
एक परमात्मा और दूसरी हमारी अंतरात्मा..!
46.
जब तक शरीर है
तब तक कमजोरियां तो रहेगी ही
इसलिए कमजोरियों की चिंता छोड़ो
और जो सही कर्म है
उस पर अपना ध्यान लगाओ..!
47.
किसी का अच्छा ना कर सको
तो बुरा भी मत करना
क्योंकि दुनिया कमजोर है
लेकिन दुनिया बनाने वाला नहीं..!
48.
सच्चा धर्म यह है कि जिन बातों को
इंसान अपने लिए अच्छा नहीं समझता
उन्हें दूसरों के लिए भी प्रयोग ना करें..!
49.
मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है,
लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।
50.
मन की शांति से बढ़कर इस
संसार में कोई भी संपत्ति नहीं है।
51.
कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि
अपने कर्मो से महान बनता है।
52.
बिना फल की कामनाएं
ही सच्चा कर्म है
ईश्वर चरण में हो समर्पण
वही केवल धर्म है।
53.
गीता में लिखा है
जब इंसान की जरूरत बदल जाती है
तब इंसान के बात करने का तरीका
बदल जाता है।
54.
चुप रहने से बड़ा कोई जवाब नहीं और
माफ कर देने से बड़ी कोई सजा नहीं।
55.
सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए
प्रसन्नता ना इस लोक में है
ना ही कहीं और।
56.
जो मन को नियंत्रित नहीं करते
उनके लिए वह शत्रु के
समान कार्य करता है।
57.
गीता में कहा गया है कोई भी
अपने कर्म से भाग नहीं सकता
कर्म का फल तो भुगतना ही पड़ता है।
58.
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है,
जैसा वह विश्वास करता है,
वैसा वह बन जाता है।
59.
जब इंसान अपने काम में आनंद खोज
लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।
60.
माफ करना और शांत रहना सीखिए ऐसी
ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे।
61.
इतिहास कहता है कि कल सुख था,
विज्ञान कहता है कि कल सुख होगा,
लेकिन धर्म कहता है, अगर मन सच्चा और
दिल अच्छा हो तो हर रोज सुख होगा।
62.
ज्यादा खुश होने पर और
ज्यादा दुखी होने पर निर्णय नहीं लेना चाहिए
क्योंकि यह दोनों परिस्थितियां आपको
सही निर्णय नहीं लेने देती हैं।
63.
जो होने वाला है वो होकर ही रहता है,
और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,
ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है,
उन्हें चिंता कभी नही सताती है।
64.
जिस मनुष्य के पास सब्र की ताकत है
उस मनुष्य की ताकत का कोई
मुकाबला नहीं कर सकता।
65.
न तो यह शरीर तुम्हारा है और न
ही तुम इस शरीर के मालिक हो,
यह शरीर 5 तत्वों से बना है –
आग, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश,
एक दिन यह शरीर इन्ही
5 तत्वों में विलीन हो जाएगा।
66.
सत्य कभी दावा नहीं करता कि मैं सत्य हूं
लेकिन झूठ हमेशा दावा करता हैं
कि सिर्फ मैं ही सत्य हूं।
67.
सही कर्म वह नहीं है जिसके
परिणाम हमेशा सही हो
अपितु सही कर्म वह है जिसका
उद्देश्य कभी गलत ना हो।
68.
जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु
उतनी ही निश्चित है, जितना कि
मृत होने वाले के लिए जन्म लेना।
इसलिए जो अपरिहार्य है
उस पर शोक मत करो।
69.
धरती पर जिस प्रकार मौसम में
बदलाव आता है, उसी प्रकार
जीवन में भी सुख-दुख आता जाता रहता है।
70.
केवल व्यक्ति का मन ही
किसी का मित्र और शत्रु होता है।
71.
परिवर्तन ही संसार का नियम है,
एक पल में हम करोड़ों के मालिक हो जाते है
और दुसरे पल ही हमें लगता लगता है
की हमारे आप कुछ भी नही है।
72.
वह व्यक्ति जो अपनी मृत्यु के समय मुझे याद
करते हुए अपना शरीर त्यागता है, वह मेरे
धाम को प्राप्त होता है और इसमें कोई शंशय नही है।
73.
मानव कल्याण ही भगवत गीता का प्रमुख उद्देश्य है,
इसलिए मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते
समय मानव कल्याण को प्राथमिकता देना चाहिए।
74.
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है,
जैसा वो विश्वास करता है
वैसा वो बन जाता है।
75.
सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के
लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है
ना ही कहीं और !!
76.
मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा
मुझसे जुड़े रहते हैं और जो
मुझसे प्रेम करते हैं !!
77.
क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि
व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब
तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है
तब व्यक्ति का पतन हो जाता है !!
78.
जो मन को नियंत्रित नहीं करते
उनके लिए वह शत्रु के समान
कार्य करता है !!
79.
हे अर्जन हम दोनो ने कई
जन्म लिए है मुझे याद है
लेकिन तुम्हे नही !!
जो दान बिना सत्कार के
कुपात्र को दिया जाता है
वह तमस दान कहलाता है।
80.
कोई भी इंसान जन्म से
नहीं बल्कि अपने कर्मो से
महान बनता है !!
जो चीज़े हमारे दायरे से बाहर हो
उसमें समय गंवाना मूर्खता ही होगी।
81.
प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी
का ढेर, पत्थर और सोना
सभी समान हैं!!
मैं करता हूँ ” ऐसा भाव उत्पन्न होता है
इसको ही ” अहंकार ” कहते है।
82.
कर्म मुझे बांधता नहीं क्योंकि मुझे
कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं !!
उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है
ना कभी था ना कभी होगा
जो वास्तविक है वो हमेशा था
और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
GITA JAYANTI 2022 DATE
वर्ष 2022 में गीता जयंती 3 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी और यह पवित्र ग्रंथ भगवत गीता का 5159वां जन्म दिवस होगा।